किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण और उपाय kidney kharab hone ke lakshan in hindi

Kidney Kharab Hone Ke Lakshan in Hindi

जब बैक्टीरिया या वायरस किडनी के अंदर प्रवेश कर जाते हैं, तो इस कारण से किडनी संक्रमित हो जाता है। किडनी का संक्रमण, एक या दोनों किडनी को प्रभावित कर सकता है। किडनी का संक्रमण, मूत्र पथ संक्रमण (यूटीआई) का एक प्रकार है। मेडिकल भाषा में इसे पायलोनेफ्राइटिस कहा जाता है।

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किडनी का काम रक्त को शुद्ध करना, अपशिष्ट पदार्थ को बाहर निकालना और यूरीन बनाना है। वे आपकी रीढ़ के दोनों ओर स्थित होती हैं, और आंशिक रूप से पसलियों के निचले हिस्से द्वारा संरक्षित होती हैं। किडनी, यूरिनरी ट्रैक्ट का हिस्सा होती हैं और इसमें यूरेटर (मूत्रवाहिनी), ब्लैडर(मूत्राशय) और यूरेथ्रा(मूत्रमार्ग) भी शामिल हैं।

किडनी इन्फेक्शन होने के शुरुआती लक्षण क्या हैं? kidney infection symptoms in hindi

kidney kharab hone ke lakshan in hindi- किडनी खराब होने के लक्षण आमतौर पर कुछ घंटों या दिनों में बहुत तेजी से विकसित होते हैं। किडनी में संक्रमण होने के सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • मतली या उल्टी
  • बार-बार यूरीन पास करने की ज़रूरत महसूस होना
  • यूरीन में रक्त या मवाद आना
  • सेप्सिस (यदि इन्फेक्शन को अनुपचारित छोड़ दिया जाए)
  • बुखार
  • पीठ, बाजू या कमर में दर्द
  • कंपकंपी या ठंड लगना
  • दर्द, जलन, और/या बार-बार पेशाब आना
  • दुर्गंधयुक्त मूत्र
  • बहुत कमज़ोरी या थकान महसूस होना
  • भूख में कमी
  • बीमार महसूस करना या बीमार होना
  • दस्त

किडनी इन्फेक्शन होने के कारण क्या हैं? kidney kharab hone ke lakshan in hindi

किडनी में संक्रमण उम्र देख के नहीं होता यह किसी भी उम्र में हो सकता है, किन्तु यह महिलाओं में अधिक देखने को मिलता है। इसका मुख्य कारण यह है कि महिलाओं का मूत्रमार्ग छोटा होता है, जिससे बैक्टीरिया का किडनी तक पहुंचना आसान हो जाता है। साथ ही वे यौन रूप से अधिक सक्रिय होती हैं इसीलिए कम उम्र की महिलाएं सबसे अधिक असुरक्षित होती हैं।

Kidney Kharab Hone Ke Lakshan in Hindi

जब किडनी में किसी भी प्रकार का संक्रमण होता है, तो पुरुषों और महिलाओं दोनों को समान लक्षणों देखने को मिलता है। 65 वर्ष से कम उम्र के जिस पुरुष को यूटीआई है, उसमें अन्य स्थितियों का निदान होने की संभावना सबसे अधिक है। डॉक्टर अन्य प्रकार के संक्रमणों के लिए भी जांच कर सकते हैं और यूटीआई के लक्षण का पता लगा सकते हैं।

किडनी संक्रमण के कारण निम्नलिखित हो सकते हैं है:

  • यूटीआई होना
  • किडनी स्टोन
  • गर्भावस्था
  • मधुमेह
  • मूत्र कैथेटर लगा होना
  • पुरुषों में बढ़ा हुआ प्रोस्टेट
  • संभोग के दौरान बैक्टीरिया का आंत से जननांगों में स्थानांतरण
  • दवा या चिकित्सीय स्थिति के कारण इम्मयूनिटी का कमजोर होना
  • रीढ़ की हड्डी की चोट या नर्व डैमेज जो ब्लैडर इन्फेक्शन के लक्षणों को रोक सकती है
  • मूत्र पथ का आकार इस प्रकार होना कि मूत्र आसानी से न निकल सके
  • वेसिकोयूरेटरल रिफ्लक्स होना, जहां यूरिनरी ट्रैक्ट यूरिन को वापस यूरेटर में प्रवाहित करने की अनुमति देता है

किडनी इन्फेक्शन को होने से कैसे रोक सकते हैं?

सबसे पहले यूटीआई को रोकने से किडनी संक्रमण की रोकथाम की जा सकती है, क्योंकि अधिकांश किडनी संक्रमण मूत्राशय और मूत्रमार्ग संक्रमण के रूप में शुरू होते हैं। किडनी इंफेक्शन को निम्नलिखित तरीकों से बचा जा सकता है।

  • बहुत सारा पानी पियें।
  • सेक्स के बाद यूरीन पास करें।
  • जन्म नियंत्रण विधियों का सोच समझकर चुनाव करें।
  • अपने जेनिटल्स को आगे से पीछे की तरफ तक पोंछें।
  • जब भी आपको लगे तो यूरिन पास करें न कि उसे रोकें ।
  • अपने जननांगों को हर दिन धोएं, और यदि संभव हो तो यौन संबंध बनाने से पहले।
  • कब्ज का इलाज करवाएं- कब्ज होने से यूटीआई विकसित होने की संभावना बढ़ सकती है।

किडनी इन्फेक्शन में क्या खाना चाहिए? kidney kharab hone par kya khana chahiye

अपने आहार में कोई भी सप्लीमेंट शामिल करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें। मूत्र पथ के संक्रमण से जल्दी ठीक होने के लिए, निम्नलिखित खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं:-

जामुन: शोध से पता चला है कि जामुन में पाया जाने वाला प्रोएन्थोसाइनिडिन, संक्रमण पैदा करने वाले कीटाणुओं को मूत्र पथ की लेयर पर आने से रोक सकता है।

प्रोबायोटिक्स में उच्च खाद्य पदार्थ: संक्रमण से लड़ने में हेतु लाभकारी बैक्टीरिया से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें, जैसे अचार, सॉकरौट, सादा दही आदि।

उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थ: केले, बीन्स, दालें, बादाम, जई एवं अन्य साबुत अनाज उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थों के उदाहरण हैं जो शरीर से अवांछित कीटाणुओं को हटाने में मददगार साबित होते है।

सैमन: ओमेगा-3 फैटी एसिड, जो ठंडे पानी की मछलिओं में पाया जाता है, यूटीआई के कारण होने वाली सूजन को कम करने में बेहद मदद कर सकता है। जो लोग मछली नहीं खाते, उनके लिए मछली के तेल की गोलियाँ एक अच्छा विकल्प हो सकती हैं।

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किडनी इन्फेक्शन में क्या नहीं खाना चाहिए?

अपने आहार में केवल नए खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थों को शामिल करने के अलावा, यूटीआई से रिकवर होने के लिए आहार में कुछ वस्तुओं से परहेज करना भी शामिल है। अगर आपको यूटीआई है तो मीठे से दूर रहें। आजकल, बड़ी संख्या में व्यावसायिक खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों में चीनी शामिल है। अफसोस की बात है कि इससे संक्रमण कि स्थिति और भी बिगड़ सकती है। इन मीठे व्यंजनों का सेवन कम करने से यूटीआई उपचार में सहायता मिलेगी। कुछ खाद्य पदार्थ जिनसे बचना चाहिए:

  • मीठे खाद्य पदार्थ: शुगर, कार्बोहाइड्रेट, सोडा, अल्कोहल (शराब), और आर्टिफिशियल स्वीटनर्स नहीं खाने चाहिए।
  • मसालेदार व्यंजन:  कुछ मसालेदार भोजन से मूत्राशय में जलन हो सकती है।
  • खट्टे फल: कुछ फल बहुत एसिडिक होते हैं, जैसे संतरे, नींबू, मौसमी और अंगूर। विटामिन सी से भरपूर होने के बावजूद(जो प्रतिरक्षा को बढ़ाते हैं), ये मूत्राशय में जलन भी पैदा कर सकते हैं और यूटीआई के लक्षणों को खराब कर सकते हैं।
  • कैफीन युक्त पेय पदार्थ: जब आपको यूटीआई हो, तो बहुत सारा पानी पीना ज़रूरी है, लेकिन कॉफी और अन्य कैफीनयुक्त पेय से बचें।

किडनी की सूजन को कम कैसे करें?

किडनी में मूत्र जमा होने के कारण किडनी में होने वाली सूजन को हाइड्रोनफ्रोसिस कहा जाता है। इसका कारण है: ट्यूब(यूरेटर-जो मूत्र को किडनी से ब्लैडर तक ले जाती है) के ऊपरी सिरे पर यूरीन के प्रवाह में आंशिक या पूरी तरह से रुकावट होना। हालाँकि यह कभी-कभी बच्चों में विकसित हो सकता है, नवजात शिशु अक्सर हाइड्रोनफ्रोसिस के साथ पैदा होते हैं। यह सामान्य मूत्र पथ विसंगतियों में से एक है।​

हाइड्रोनफ्रोसिस की समस्या किन कारणों से हुई है उसके आधार पर ही उपचार निर्भर करता है। यूरेटेरोपेल्विक जंक्शन (यूपीजे) वाले बच्चों में, यदि हाइड्रोनफ्रोसिस के कारण से किडनी पर दबाव पड़ता है तो पाइलोप्लास्टी आवश्यक हो सकती है। हालाँकि यह एक बड़ी प्रक्रिया है, जटिलताओं की संभावना आमतौर पर काफी कम होती है और सही होने की दर बहुत अधिक होती है।

वयस्कों के लिए इस समस्या के कुछ उपचार में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  • किडनी में जमा अतिरिक्त यूरीन को बाहर निकालना
  • रुकावट हटाना
  • मूत्र पथ के संक्रमण के इलाज हेतु एंटीबायोटिक्स
  • अतिरिक्त यूरिक एसिड को बनने से रोकने के लिए दवाएं
  • मूत्र निकालने के लिए मूत्राशय कैथेटर
  • नेफ्रोस्टॉमी(किडनी से मूत्र निकालने के लिए मिडसेक्शन में एक ट्यूब डालना)
  • किसी रुकावट को दूर करने के लिए सर्जरी
  • किडनी का एक हिस्सा या पूरा हिस्सा निकालने के लिए सर्जरी

किडनी इन्फेक्शन के लिए टेस्ट कौन से हैं?

किडनी इन्फेक्शन की समस्या का समाधान करने के लिए, आपका डॉक्टर निम्नलिखित परीक्षणों का उपयोग कर सकता है:

यूरिनालिसिस: संक्रमण के लक्षण देखने के लिए आपके यूरिन सैंपल का टेस्ट भी किया जाएगा।

यूरिन कल्चर: यूरिन कल्चर में, यूरिन में बैक्टीरिया कुछ ही दिनों में कल्चर डिश पर विकसित हो जाते हैं।

वॉयडिंग सिस्टोयूरेथ्रोग्राम (वीसीयूजी): यह मूत्राशय(ब्लैडर) और मूत्रमार्ग(यूरेथ्रा) की एक एक्स-रे इमेज होती है जो मूत्राशय के भरे होने और पेशाब करते वक्त ली जाती है।

डिजिटल रेक्टल टेस्ट (डीआरई): डीआरई प्रोस्टेट की एक शारीरिक टेस्ट है।

ब्लड कल्चर: ब्लड कल्चर की सहायता से यह पता चल सकता है कि आपका संक्रमण आपके रक्त में फैल गया है अथवा नहीं।

आपका मेडिकल इतिहास: आपसे आपके लक्षणों के बारे में कि यह कब शुरू हुए, और आपके सामान्य स्वास्थ्य इतिहास के बारे में प्रश्न पूछे जाएंगे।

बॉडी टेस्ट: ब्लड और यूरिन सैंपल को एकत्र करने के लिए सामान्य हेल्थ टेस्ट भी किया जाता है। दर्द या कोमलता की जाँच के लिए डॉक्टर संभवतः आपके पेट पर दबाव भी डालते है।

सीटी स्कैन: किडनी संक्रमण का निदान हेतु सीटी स्कैन आवश्यक नहीं है, किन्तु यह मूत्र पथ और किडनी की डिटेल्ड 3डी इमेजे दिखाता है जिससे समस्याओं का पता लगाने में आसान हो जाता है।

किडनी अल्ट्रासाउंड: अल्ट्रासाउंड से किडनियों और यूरेटर्स की इमेजे बनाकर यह पता लगाया जा सकता है कि क्या वहां घाव, पथरी या अन्य चीजें हैं जो मूत्र पथ को अवरुद्ध कएने में सहायता करती हैं।

डिमरकैप्टोसुकिनिक एसिड (डीएमएसए) सिंटिग्राफी: इस परीक्षण में रेडियोएक्टिव पदार्थ की थोड़ी मात्रा का उपयोग किया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किडनी कितनी अच्छी प्रकार काम कर रही है।

 

किडनी इन्फेक्शन का उपचार क्या है? kidney kharab hone ka treatment in hindi

किडनी संक्रमण का इलाज के लिए डॉक्टर्स एंटीबायोटिक्स का प्रयोग करते हैं। एंटीबायोटिक्स कम से कम 14 दिनों तक लेनी चाहिए। यदि आप बहुत ज्यादा अस्वस्थ हैं तो आपको अस्पताल में इलाज कराने या लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स लेने की जरुरत पड़ सकती है।​

आमतौर पर, जैसे ही थेरेपी शुरू होगी, वैसे ही आप बेहतर महसूस करना शुरू कर देंगे। जल्दी निदान और एंटीबायोटिक उपचार के पश्चात, अधिकांश मरीज लगभग दो सप्ताह के भीतर पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं।

बुजुर्ग लोगों या अंतर्निहित चिकित्सा समस्याओं वाले लोगों को ठीक होने में अधिक समय भी लग सकता है। किडनी संक्रमण के इलाज के लिए डॉक्टर, एक एंटीबायोटिक या फिर एंटीबायोटिक दवाओं का एक संयोजन लिख सकते हैं। उनमें निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  • ट्राइमेथोप्रिम-सल्फामेथोक्साज़ोल (टीएमपी-एसएमएक्स)।
  • अमोक्सिसिलिन या ऑगमेंटिन।
  • सेफ्ट्रिएक्सोन या सेफैलेक्सिन।
  • सिप्रोफ्लोक्सासिन या लेवोफ्लोक्सासिन।

सुनिश्चित करें कि आप भरपूर आराम कर रहें हैं। किडनी का संक्रमण शारीरिक रूप से थका देता है, भले ही आप सामान्य रूप से स्वस्थ और मजबूत हों। पर्याप्त रूप से सवस्थ होने में 2 सप्ताह तक का समय लग सकता है। किडनी संक्रमण वाले अधिकांश इलाज अस्पतालों में ही किया जाता है।

किडनी संक्रमण एक बहुत ही घातक बीमारी है और इसका इलाज स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करता है। इसके इलाज का खर्च आपकी जेब पर भी भारी पड़ सकता हैं। ऐसे गंभीर बीमारियों के लिए आप हेल्थ इंश्योरेंस (health insurance plans) खरीद सकते हैं, जहां आपको वित्तीय रूप से काफी हद तक सहायता मिलती है। हेल्थ इंश्योरेंस आपके बीमारी के खर्चों को भी कवर करती है

और साथ में कई और स्वास्थ्य सुविधाएं भी प्रदान करती है। आप केयर हेल्थ के क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस प्लान (Critical Illness Insurance) या सीनियर सिटीजन हेल्थ इंश्योरेंस प्लान(Senior Citizen Health Insurance Plans) भी ले सकते हैं, जहां आपके किडनी की बीमारी को भी कवर किया जााता है। हेल्थ इंश्योरेंस लेने से आप अस्पताल और खर्चों के टेंशन से काभी हद तक फ्री होते जाते हैं।

डिस्क्लेमर: किडनी इंफेक्शन से जुड़े कीसी भी तरह के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से अवश्य मिले। स्वास्थ्य बीमा की सुविधाएँ भी अलग-अलग हो सकती हैं। दावों की पूर्ति पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अधीन है।